Monday, October 14, 2019

Month: August 2018

अररिया,भरगामा प्रखंड के मनाउल्लाह पट्टी चौक के समीप एक ट्रक और ऑटो की ज़बरदस्त टक्कर

अररिया ज़िले के भरगामा प्रखंड के मनाउल्लाह पट्टी चौक के समीप एक ट्रक और ऑटो की ज़बरदस्त टक्कर हुई जिसमें ...

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सुप्रीम कोर्ट जम्मूकश्मीर को प्राप्त विशेषाधिकार अनुच्छेद 35 ए आज की सुनवाई टली

नई दिल्ली (जेएनएन) : सुप्रीम कोर्ट में आज की सुनवाई, जम्मू कश्मीर को प्राप्त विशेषाधिकार अनुच्छेद 35ए पर सुप्रीम कोर्ट में ...

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उत्तर प्रदेश, केरल, तमिलनाडू, ओडिसा, महाराष्ट्रा, अरूणाचल प्रदेश एवं बिहार के वैज्ञानिकों ने सीखे मखाना उ

बिजिनेस इनक्यूवेशन एवं वैल्यू चैन इंटीग्रेशन फाॅर डबलिंग फारमर्स इनकम“ विषयक 21 दिवसीय समर स्कूल सह ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम के सभी प्रतिभागियोंद्वारा भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय, पूर्णियाँ के मखाना अनुसंधान ईकाई का भ्रमण किया गया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली द्वारा वित्तपोषित,निदेशक प्रसार शिक्षा डा0 आर0 के0 सोहाने के नेतृत्व में 21 दिवसीय समर स्कूल सह ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुरमें बिहार एवं देश के अन्य प्रदेशों में कार्यरत कृषि वैज्ञानिकों के ज्ञान के संवर्द्धन हेतु किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद््देश्य माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्रमोदी द्वारा निर्धारित लक्ष्य 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के उपलक्ष में आयोजित किया गया है। इस ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम में सात राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश,केरल, तमिलनाडू, ओडिसा, महाराष्ट्रा, अरूणाचल प्रदेश एवं बिहार के कुल 25 वैज्ञानिकों ने भाग लिया। इसी क्रम में जलीय खरपतवार से आच्छादित अनुपयुक्त एवं अनुत्पादकजलजमाव क्षेत्रों की उत्पादकता, लाभप्रदता में वृद्धि एवं टिकाऊ खेती की तकनीकी जानाकारी प्राप्त करने के लिए कुल 25 वैज्ञानिकों ने भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय,पूर्णियाँ के मखाना अनुसंधान ईकाई का भ्रमण किया। भ्रमण के दौरान सभी प्रतिभागी वैज्ञानिकों का स्वागत डाॅ0 पारस नाथ सह अधिष्ठाता-सह-प्राचार्य, भोला पासवान शास्त्रीकृषि महाविद्यालय, पूर्णियाँ ने किया साथ ही साथ विगत 6 वर्षों से मखाना अनुसंधान परियोजना की उपलब्धियों पर चर्चा करते बताया कि इस महाविद्यालय द्वार मखाना कीउन्नतशील प्रजाति सबौर मखान-1, मखाना उत्पादन तकनीक एवं कीट प्रबंधन तकनीक विकसित की गई है। प्रधान अन्वेषक मखाना अनुसंधान परियोजना डा0 अनिल कुमार नेमखाना आधारित फसल पद्धति से बिहार में जलीय खरपतवार से आच्छादित अनुपयुक्त एवं अनुत्पादक जलजमाव क्षेत्रों की उत्पादकता, लाभप्रदता में वृद्धि एवं टिकाऊ खेती केलिए अतिआवश्यक कार्यः इन क्षेत्रों की साफ-सफाई एवं जीर्नोद्धार करना, सोलर पम्प की व्यवस्था आदि के साथ-साथ मखाना आधारित वार्षिक फसल पद्धति के बारें में विस्तारपूर्वक बतायाः (क) जुलाई महीने में 1-2 फीट तक जलजमाव वाला क्षेत्र जो अक्टूबर में सुख जाता है। इन क्षेत्रों में किसान गरमा धान की खेती करते हैं, लेकिन इससे लाभ बहुत ही कम होता है।खेत पद्धति- मखाना आधारित टिकाऊ फसल पद्धति द्वारा मखाना उत्पादकों के जिवीकोपार्जन हेतु, सामाजिक एवं आर्थिक उन्नयन मखाना-सरसों फसल पद्धति से सबसे अधिकआय एवं लागत अनुपात ( 3.5ः1), प्राप्त होता है, इसके बाद क्रमषः मखाना-सिंघाड़ा, मखाना- धान- मसूर, मखाना- धान- केराव फसल पद्धति से प्रप्त होता है। मखाना- बरसीम,मखाना- धान- मटर, मखाना- धान- मसूर, मखाना- धान- तीसी, मखाना- धान- खेसारी, मखाना- धान- चना ,मखाना- धान- बांकला, मखाना- धान- केराव (ख) जुलाई महीने में 3-4 फीट तक जलजमाव वाला क्षेत्र जो जनवरी से फनवरी में सुख जाता है। तालाब पद्धति- मखाना आधारित टिकाऊ फसल पद्धति मखाना- सिंघाड़ा (ग) जुलाई महीने में 7-10 फीट तक जलजमाव वाला क्षेत्र जो सालों भर जलमग्न रहता है। तालाब पद्धति- मखाना आधारित टिकाऊ फसल पद्धति मखाना- सिंघाड़ा एवं मखाना-सह- मत्स्यपालन। डाॅ0 पंकज कुमार यादव ने मखाना पौधशाला से मुख्य खेत में मखाना के पौधों की रोपाई की वैज्ञानि विधी को विस्तार पूर्वक बताया। डा0 पारस नाथ ने बताया कि मखानाफसल में कीट प्रबंधन: खेत पद्धति- मखाना पौध की रोपाई से पूर्व इमिडाक्लोरपिड 70 ॅै अथवा थायोमेथोक्सैम 70 ॅै 5 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर उसके जड़ को आधाघंटा तक उस घोल मे डुबोकर षोधित करना चाहिए तथा मखाना पौध की रोपाई के 40 दिनों बाद 5 प्रतिषत नीम तेल का घोल 25 दिनों के अन्तराल पड़ छिड़काव करना चाहिए ।तालाब पद्धति - मखाना पौध की रोपाई के 40 दिनों बाद 5 प्रतिषत नीम तेल का घोल 25 दिनों के अन्तराल पड़ छिड़काव करना चाहिए । इस अवसर पर मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश,केरल, तमिलनाडू, ओडिसा, महाराष्ट्रा, अरूणाचल प्रदेश एवं बिहार के कुल 25 वैज्ञानिकों जैसे डा0 धनंजय सिंह, डा0 योगेन्द्र सिंह, डा0 शैलेन्द्र सिंह, डा0 सचिदानंद प्रसाद, डा0 आलोक भारती, डा0 आर0 पी0 शर्मा, डा0 सचिदानंद सिंह, डा0 रजनीश मिश्रा, डा0 नितिन पाण्डेय एवं डा0 फूल कुमारी आदि के साथ अन्य वैज्ञानिकों ने भी भाग लिया। कार्यक्रमका संचालन प्रधान अन्वेषक मखाना अनुसंधान परियोजना डा0 अनिल कुमार तथा धन्यवाद ज्ञापन डाॅ पंकज कुमार यादव द्वारा किया गया।

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भाई की कलाई पर राखी बांधने जा रही महिला को अनियंत्रित ट्रैक्टर ने रौंदा

रिपोटर-हेमन्त कुमार हिमांशू : भाई की कलाई पर राखी बांधने जा रही महिला को अनियंत्रित ट्रैक्टर ने रौंदा, दर्दनाक मौत ...

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मुजफ्फरपुर : शहर में बर्रेड ट्रैफिक की समस्या पर नियंत्रण पाने को अधिकारी करेंगे यह बड़े काम।

मुजफ्फरपुर शहर में ट्रैफिक की समस्या से निजात दिलाने के लिए फ्लाईओवर, एलिवेटेड वह सड़कों की चौड़ीकरण किया जाएगा। शहर ...

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आपसी विवाद में जमकर मारपीट रोड़ेबाजी फायरिंग से से आधा दर्जन लोग घायल।

पटना, मनेर थाना क्षेत्र के पूर्वी सूअर मलवा गांव में आपसी विवाद को लेकर दो गुटों में जमकर मारपीट सोडे ...

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जम्मू कश्मीर में जन्मी.सुपर स्टार अनारा गुप्ता हिन्दी और भोजपुरी फिल्मों की अभिनेत्री

जम्मू कश्मीर में जन्मी मुंबई को बनाया कर्म स्थली और बिहार यूपी की सुपर स्टार अनारा गुप्ता हिन्दी और भोजपुरी ...

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