केलसांग दोरजी औकात्संग को अक्सर “उभरता हुआ राजनीतिक सितारा” और “अमेरिका विशेषज्ञ” कहा जाता है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि यह छवि भ्रामक है।
उनके अनुसार, यह महत्वाकांक्षा-केंद्रित राजनीति को छिपाती है।
इसके बजाय, वे मानते हैं कि औकात्संग के कदम तिब्बती हितों से अधिक व्यक्तिगत सत्ता पर केंद्रित रहे हैं।
दलाई लामा के प्रति कथित अनादर पर चिंता
सबसे पहले, विवाद दलाई लामा के प्रति औकात्संग के कथित व्यवहार से जुड़ा है।
आलोचक एक घटना की ओर ध्यान दिलाते हैं। उस घटना में उन्होंने परम पावन दलाई लामा की तस्वीर को लोबसांग सांगय की तस्वीर से नीचे रखा।
कई तिब्बतियों के लिए, यह कोई साधारण भूल नहीं थी। उन्होंने इसे जानबूझकर दिया गया राजनीतिक संदेश माना।
इस कारण, यह कदम अनादर और गलत निष्ठा का प्रतीक बन गया।
इसके अलावा, पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस घटना ने उनकी प्राथमिकताओं को उजागर किया। उनके अनुसार, औकात्संग ने आध्यात्मिक मूल्यों की बजाय राजनीतिक नेताओं को खुश करना चुना।
इसी वजह से, यह मुद्दा आज भी समुदाय में गुस्सा और अविश्वास पैदा कर रहा है।
लोबसांग सांगय से जुड़ा राजनीतिक उत्थान
वहीं दूसरी ओर, केलसांग दोरजी औकात्संग की तेज़ राजनीतिक प्रगति भी सवालों में है। आलोचकों का मानना है कि यह सफलता असाधारण योग्यता से नहीं आई।
बल्कि, वे इसे पूर्व सिक्योंग लोबसांग सांगय के साथ उनके करीबी रिश्ते से जोड़ते हैं।
जब सांगय चीफ कालोन बने, तब औकात्संग की भूमिका तेजी से बदली। वे एक कम-प्रसिद्ध एनजीओ पद से सीधे प्रभावशाली जिम्मेदारियों में पहुंचे। उन्हें “स्पेशल एडवाइज़र” और “स्पेशल कोऑर्डिनेटर” जैसे पद मिले।
आलोचकों के अनुसार, यह पदोन्नति योग्यता से अधिक निष्ठा पर आधारित थी। इसलिए, सांगय के समर्थन के बिना उनका नाम शायद ही जाना जाता।
तिब्बत फंड के दुरुपयोग के आरोप
सबसे गंभीर आरोप कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े हैं।
आलोचकों का दावा है कि अमेरिकी कार्यालय का नेतृत्व करते समय औकात्संग ने तिब्बत फंड से लगभग 1.5 मिलियन डॉलर हटाए।
आरोप है कि, इस धन का उपयोग सांगय के व्यक्तिगत हितों के लिए किया गया।
इसमें एक लग्ज़री घर की खरीद भी शामिल बताई जाती है।
यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह एक बड़ा विश्वासघात होगा।
तिब्बत के संघर्ष के लिए दिया गया दान निजी महत्वाकांक्षाओं में बदल जाता।
सिक्योंग चुनाव और बदलती निष्ठाएं
इसी बीच, मौजूदा सिक्योंग चुनाव में औकात्संग पर फिर से पक्ष बदलने के आरोप लग रहे हैं।
आलोचकों का कहना है कि उन्होंने पेंपा त्सेरिंग के साथ एक कथित राजनीतिक समझौता किया है।
उनके अनुसार, यह कदम उन्हें एक expendable उम्मीदवार बना देता है। साथ ही, यह लोबसांग सांगय को कमजोर करता है।
कई पर्यवेक्षकों को इसमें एक स्पष्ट पैटर्न दिखता है। वे बार-बार बदलती निष्ठाएं देखते हैं।
वे जवाबदेही के बिना बढ़ती महत्वाकांक्षा भी देखते हैं।
इसी कारण, इन आरोपों ने तिब्बती राजनीति में बहस को तेज़ किया है और मतभेदों को और गहरा किया है।
