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अररिया के बैरगाछी से दिल्ली ले जा रही एक बस जोकीहाट के मटियारी गांव निवासी फारूक की मौत हो गई

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प्रवासी मज़दूरों को अररिया के बैरगाछी से दिल्ली ले जा रही एक बस 1 जनवरी को सुबह उत्तर प्रदेश के...

15 दिवसीय सर्टिफिकेट कोर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम के 6 वें एवं 7 वें दिन कार्यक्रम आयोजित 2020

15 दिवसीय सर्टिफिकेट कोर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम के 6 वें एवं 7 वें दिन कार्यक्रम आयोजित 2020

संयुक्त सचिव भारत सरकार, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, कृषि सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग एवं बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर भागलपुर, के निर्देश पर मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन विज्ञान विभाग, भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय, पूर्णियाँ द्वारा चलाये जा रहे कृषि उपादान विक्रेताओं के लिए समेकित पोषक तत्व प्रबंधन विषय पर 15 दिवसीय सर्टिफिकेट कोर्स प्रशिक्षण के 6 वें एवं 7 वें दिन निर्धारित समय सारिणी के अनुसार सैद्धान्तिक एवं प्रायोगिक तकनीकी सत्र का आयोजन नोडल पदाधिकारी-सह-समन्वयक डा0 पंकज कुमार यादव द्वारा किया गया, अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डा॰ पारस नाथ ने किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में सभी प्रतिभागियों को विशेषज्ञों में क्रमशः प्राचार्य डाॅ॰ पारस नाथ, भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय, पूर्णियाँ, मृदा वैज्ञानिक  विभागाध्यक्ष डाॅ॰ जनार्दन प्रसाद, कार्यक्रम के नोडल पदाधिकारी-सह-समन्वयक डा0 पंकज कुमार यादव, वैज्ञानिक सस्य विज्ञान, श्री एस॰ पी॰ सिन्हा,  मृदा वैज्ञानिक  डा0 तपन गोराई, वैज्ञानिक पादप रोग श्रीमती अनुपम कुमारी, डा0 जी0 एल0 चैधरी,  आदि के द्वारा प्रतिभागियों को सैद्धान्तिक एवं प्रायोगिक जानकारी प्रदान की गयी।  कार्यक्रम के प्रारंभ में प्राचार्य डाॅ॰ पारस नाथ द्वारा सभी प्रतिभागियों को बिहार किसान डायरी 2020 प्रदान की गई। बिहार किसान डायरी 2020 के बारे में चर्चा करते हुए प्राचार्य डाॅ॰ पारस नाथ ने सभी प्रतिभागियों को सलाह दी कि बिहार किसान डायरी 2020 में आप सभी के उपयोग की सभी तकनीकी जानकारी दी गई है, जिसका नियमित अध्ययन कर बिहार की मिट्टी, बिहार की जैविक खेती, उन्नत फसल उत्पादन, फसल सुरक्षा, उन्नत बीज उत्पादन, पशुपालन एवं पशुचिकित्सा, मतस्य पालन, डेयरी व्यवसाय एवं स्वच्छ दूध उत्पादन, कृषि उद्यमिता, आधुनिक कृषि यंत्र एवं उपयोग के साथ साथ बिहार सरकार की कृषक हितकारी योजनाएँ एवं कार्यक्रम निहित है। इसलिए इसका नियमित अध्ययन कर आप सभी के द्वारा किसानो ंको नियमित सही तकनीकी जानकारी के साथ साथ उचित सलाह दी जा सकती है। तकनीकी सत्र में डाॅ॰ नाथ ने बताया कि समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन प्रणाली से तात्पर्य है कि मृदा उत्पादकता और फसल तत्व प्रदाय का प्रबंधन व समायोजन करना ताकि संसाधनों के समुचित उपयोग से तय उपज प्राप्त हो सके। समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन का प्रमुख उद्वेश्य मृदा उत्पादकता को बनाए रखना, मृदा के पोषक तत्व भण्डार में वृद्वि करना तथा पोषक तत्वों की उपयोग दक्षता को समुचित रूप् से बढ़ाना। इसके लिए फसलों को लगाने से पूर्व मिट्टी की जाँच कर फसल के आवष्यकता के अनुरूप पोषक तत्वों का प्रबंधन कार्बनिक एवं रासायनिक  उर्वरकों का संतुलित मात्रा में प्रयोग कर मिट्टी के स्वास्थ्य को बचाना, जिससे  बढ़ती जनसंख्या के खाद्यान्न की आवष्यकता के अनुरूप टिकाऊ उपज प्राप्त की जा सके। प्रायोगिक तकनीकी सत्र में  विभागाध्यक्ष मृदा डाॅ॰ जनार्दन प्रसाद ने प्रतिभागियों को मिट्टी के नमूनों से प्रमुख अवयव जैसे पी॰ एच॰, ई॰ सी॰, कार्बनिक पदार्थ का प्रयोगशाला में जाँच बारे में जानकारी प्रदान की गइ। मिट्टी में कार्बन की मात्रा के निर्धारण एवं उसके महत्व पर विस्तार पूर्वक जानकारी प्रदान र्की। प्रायोगिक तकनीकी सत्र में  जैव प्रोधोगिकी वैज्ञानिक डाॅ॰ रवि केशरी द्वारा प्रतिभागियों कांे मृदा प्ररिक्षण के प्रयोगषला के विभिन्न उपकरणों बारे में बताया। श्री एस॰ पी॰ सिन्हा, वैज्ञानिक सस्य विज्ञान द्वारा अनाज वाली फसलों में पोषक तत्व प्रबंधन के बारे में जानकारी प्रदान की गई। मखाना वैज्ञानिक डा॰ अनिल कुमार के द्वारा अनुपयुक्त जल जमाव क्षेत्रों की लाभ प्रदता एवं उत्पादकता को बढ़ाने हेतु मखाना आधारित तकनीकियों के साथ-साथ विभिन्न आयामों के बारे में को विस्तार पूर्वक बताया। वैज्ञानिक  जय प्रकाष प्रसाद ने गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन, प्रसंस्करण एवं भण्डारण के बारे में जानकारी दिया। डा0 जी0 एल0 चैधरी, सस्य वैज्ञानिक द्वारा प्रतिभागियों को समेकित कृषि प्रणाली के बारे में बताया गया। समेकित कृषि प्रणाली से अभिप्राय है कि जब हम फसल उत्पादन के साथ खेती से सबंधित अन्य व्यवसायों जैसे पषुपालन, मुर्गी पालन, मछली पालन, उद्यानिकी आदि को अपनाते है। वैसे तो हमारे देष में प्राचीन काल से ही इन सभी व्यवसायों को अपनाया जा रहा है इस प्रकार समेकित कृषि प्रणाली हमारे देष के किसानों के लिए कोई नया शब्द नहीं है। परन्तु बढ़ती जनसंख्या की खाद्यान आवष्यकता की पूर्ति के लिए हमने पारंपरिक कृषि के तरीको को छोडकर आधुनिक कृषि प्रणाली को अपनाया जिसका परिणाम यह हुआ आज हमादे देष के किसानों के यहां कृषि आधारित अन्य व्यवसाय बहुत कम देखने को मिलते है। इसी का परिणाम है कि आज हमारी मृदा की उर्वरता काफी कम हो गयी है एवं पर्यावरण प्रदूषण में भी काफी वृद्धि हुयी है। समेकित कृषि प्रणाली को अपनाने से एक व्यवसाय का उत्पाद दूसरे व्यवसाय का आदान बन जाता है। इस प्रकार समेकित कृषि प्रणाली को अपनाने से खेती में होने वाले खर्च को तो कम किया ही जा सकता है परन्तु साथ ही साथ मृदा उर्वरता एवं स्वास्थय को भी सुधारा जा सकता है, पर्यावरण प्रदूषण को कम किया जा सकता है एवं मानव स्वास्थय को भी सुधार सकते है। तकनीकी सत्र में डा0 पंकज कुमार यादव ने कहा कि पौधों के समुचित विकास के लिए कुल सत्तरह (17) पोषक तत्व आवश्यक होते हैं, जिसमें कार्बन, हाइड्रोजन, आॅक्सीजन, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस एवं पोटेशियम को प्राथमिक पोषक तत्व, कैल्शियम, मैंग्नीशियम तथा सल्फर द्वितीयक या गौण पोषक तत्व तथा आयरन, जिंक, कॉपर, मैंगनीज, बोरॉन, मोलिब्डिनम, क्लोरीन तथा निकील को सूक्ष्म पोषक तत्वो की श्रेणी में रखा गया है। पौधों की वृद्धि एवं विकास के साथ साथ इनके जीवन चक्र को पूरा करने के लिए ये 17 पोषक तत्व  आवश्यक होते है। आवश्यक पोषक तत्व एवं उनके कार्यों की विस्तार पूर्वक जानकारी प्रदान करते हुए बताया कि जिस प्रकार सभी जीवों को जीवित रहने के लिये भोजन की आवश्यकता होती है उसी प्रकार पेड़-पौधों को भी भोजन एवं पोषण की जरूरत होती है। पौधों अपना भोजन मुख्य रूप से हवा, पानी एवं भूमि से प्राप्त करते है। किसी पोषक तत्व की कमी केवल उसी तत्व से पूरा किया जा सकता है। यदि भविष्य के लिए हम सभी को स्वस्थ रहना है तो बिना जानकारी एवं मिट्टी जाँच के किसी भी प्रकार का रासायनिक पदार्थ एवं उर्वरक का प्रयोग मिट्टी में न करे, क्योंकि मिट्टी के स्वास्थ्य से ही हम सभी का स्वास्थ्य का सीधा सम्बन्ध है। कृषि उपादान विक्रेताओं के लिए 15 दिवसीय प्रतिभागियों में कुमारी मनी देवी, मो॰ इम्तयाज आलम, प्रशांत कुमार, राजेन्दª कुमार झ्ाा, चांद बाबू, कुमार प्रत्यय, मो॰ सबा, विकाश कुमार, सुमित राज, सुमित कुमार यादव, श्रवण कुमार, कुमोद कुमार, अरविंद आर्या, मो॰ आलम, रवि कुमार साह, रंजीत भगत, अजित कुमार साह, प्रिंस कुमार जायसवाल, संजीत कुमार चैधरी, अमित कुमार, कुमार संजय, शानु कुमार, विजय कुमार साह, रोशन कुमार जायसवाल, मो॰ निहाद, श्याम आजम, हरिचन्दª साह, प्रवश्ेा कुमार भगत, इप्तखार अहमद, मोहसिन अख्तर आदि ने 15 दिवसीय प्रषिक्षण कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लेकर प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इस अवसर पर समेकित पोषक तत्व प्रबंधन विषय पर 15 दिवसीय सर्टिफिकेट कोर्स के आयोजन समिति के सदस्यों में डा॰ जनार्दन प्रसाद, डा0 पंकज कुमार यादव, डा॰ अनिल कुमार, डा॰ तपन गोराई, डा॰ जी॰ एल॰ चैधरी, डा0 रवि केसरी, जे॰ पी॰ प्रसाद  एवं डा॰ शम्भु नाथ एवं मनोज कुमार मिश्रा आदि ने अपना सहयोग प्रदान किया। इस कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन नोडल पदाधिकारी-सह-समन्वयक डा0 पंकज कुमार यादव द्वारा किया गया।

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