Saturday, July 20, 2019

जोकीहाट .शांतिपूर्ण माहौल मेंं त्यौहार सम्पन्न। विधायक की भूमिका रही अहम

सांसद की सूच बूझ से नही हुआ हादसा। पुलिस प्रशासन थी सक्रिय चप्पे चप्पे पर पुलिस की तैनाती , मुख्य...

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840 बोतल कोडिनयुक्त कफ शिरप के साथ स्कार्पियो चालक सहित तीन गिरप्तार

रिपोर्ट नारायण यादव फारबिसगंज जोगबनी स्थित एसएसबी सी कम्पनी के जबानों ने सहायक कमांडेंट निरूपेश कुमार के नेतृत्व में बस...

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शिक्षा निदेशालय पटना के आदेश पर डीपीओ ने किया स्कूलों का निरीक्षण।

जोकीहाट प्रखण्ड के दर्जनों विद्यालय का जिला कार्यक्रम पदाधिकारी चन्द प्रकाश ने जोकीहाट के कई स्कूलों का निरीक्षण किया निरीक्षण...

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बिहार से मखाना निर्यात को बढ़ावा देने हेतु कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण

बिहार का व्यंजन मखाना देषवासियों के साथ-साथ विदेषियों के थाल में परोसने का एक प्रयास एपीडा के द्वारा बिहार से शुरू करने की तैयारी इसके लिए एफ॰पी॰ओ॰ एवं व्यापारी संघ के गठन की आवष्यकता -- प्रो0 (डा0) अजय कुमार सिंह,कुलपति बिहार कृषि विष्वविद्यालय, सबौर आज दिनांकः 08-08-2018 को भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय, पूर्णियाँ के द्वारा कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारावित्तपोषित बिहार से मखाना निर्यात को बढ़ावा देने हेतु एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सहहितधारक (स्टेकहोल्डर) कार्यशाला का आयोजन किया गयाइस अवसर पर प्राचार्य डाॅ0 राजेश कुमार ने सभी अतिथियों कोपुष्प गुच्छ एवं अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम की शुरूआत स्नातक कृषि की छात्राओं के स्वागतगान के साथ हुआ। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर प्रो0 (डा0) अजय कुमार सिंह ने किया। इस कार्यक्रम मे विशिष्ट अतिथि निदेशक प्रसार शिक्षा, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर डाॅ0 आर0 के0 सोहाने, श्रीमती समिधा गुप्ता सहायक महाप्रबंधक कृषि एवंप्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार, डा॰ पंकज कुमार, प्रधान वैज्ञानिक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली एवं सह अधिष्ठाता-सह-प्राचार्य डाॅ0राजेश कुमार की गरिमामयी उपस्थिति में कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत हुई। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बिहार के मखाना उत्पादक किसानों की मखान के निर्यात एवं व्यवसाय में आने वाली समस्याओं पर चर्चा कर आनेवाले समय में किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य किस प्रकार प्राप्त हो इसपर विस्तारपूर्वक चर्चा करना रही। सह अधिष्ठाता-सह-प्राचार्य डाॅ0 राजेश कुमार ने अपने स्वागत भाषण में मखाना के विकास पर विगत 6 वर्षों से चल रहे शोध कार्यों की विस्तार पूर्वक जानकारी प्रदान की साथ ही साथ महाविद्यालय की सभीगतिविधियां शिक्षा शोध, प्रसार एवं प्रशिक्षण के साथ साथ अन्य गतिविधियों के बारे में भी जानकारी प्रदान की। विशिष्ट अतिथि निदेशक प्रसार शिक्षा, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर डाॅ0 आर0 के0 सोहाने ने अपने संबोधन में कहा कि मखान के उचित विकास के लिए मिथलांचल मखाना उत्पादक संघ कागठन किया जा चूका है। जिसकी निबंधन की प्रक्रिया जारी है। इसके उपरान्त मखाना का जी॰ आई॰ टैग के लिए भारत सरकार को आवेदन किया जायेगा। कृषि विज्ञान केन्द्र, पूर्णियाँ, कटिहार, किशनगंज, अररिया, सुपौल,सहरसा, मधेपूरा के सहयोग से इन सभी जिलों में किसानों के खेत एवं तलाब पर मखाना एवं मखाना सह मत्स्य पालन तकनीक का अग्रीम पंक्ति प्रदर्शन लगाया जायेगा। जिससे किसानों को प्रति हेक्टेयर अधिकआमदनी प्राप्त होगी। श्रीमती समिन्धा गुप्ता सहायक महाप्रबंधक कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार ने मखाना व्यपारियों, मखाना उत्पादक किसानों एवंमखाना निर्यातकों के कार्यों में आने वाली सभी समस्याओं पर विस्तार पूर्वक चर्चा की तथा भारत सरकार द्वारा चालाये जा रही निर्यात को बढ़ावा देने वाली विभिन्न योजना के बारे में विस्तृत जानकारी के साथ साथविŸाीय समस्याओं के समाधान पर भी चर्चा की। साथ ही साथ मखाना व्यपारियों, मखाना उत्पादक किसानों एवं मखाना निर्यातकों को आस्वस्त किया कि बिहार से मखाना के निर्यात में होने वाली सभी प्रकार कीसमस्याओं के निदान हेतु हर संभव मदद कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रदान की जायेगी। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो0 (डा0) अजय कुमार सिंह, कुलपति बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर ने अपने सम्बोधन में मखाना उत्पादक किसानों की समस्याओं को विस्तार पूर्वकसुना तथा व्यवसायी किसानों की किस प्रकार मदद कर सकते है, इस पर भी चर्चा की साथ ही साथ उन्होनें यह भी बताया की आने वाले समय में मखाना उत्पादक किसानों की आय बढ़ाने में मखाना की उन्नतशील प्रजातीसबौर मखाना - 1 एवं मखाना उत्पादन तकनीकी विशेष उपयोगी सिद्ध होगी। उन्होने मखाना वैज्ञानिकों की टीम को निर्देशित किया कि वर्ष में दो बार मखाना उत्पादन किस प्रकार किया जाय, इस पर विशेष शोध करें साथही साथ किसानों के खेत पर भी इस प्रकार के प्रयोग लगाये जाय। जिससे किसान जागरूक होकर खेत पद्धति में मखाना आधारित फसल प्रणाली को अपनाये तथा मखाना उत्पादन कर अधिक से अधिक आय प्राप्त करसके। किसनों के तरफ से प्राप्त सुझाव जैसे मखाना के न्युनतम मुल्य का निर्धारण, मखाना की खेती का विस्तार हेतु सरकार द्वारा मखाना की खेती में अनुदान की प्रावधान किया जाय एवं मखाना कोरिडोर परियोजनाको जल्द से जल्द लागु कराया जाय। उन्होनें किसानों की समस्यों को सुनते हुए आस्वस्त किया कि इन बातों कृषि मंत्रालय बिहार सरकार तक पहुँचायेगें जिससे मखाना का सर्वागिण विकास हो सके। इस कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र, पूर्णियाँ, कटिहार, किशनगंज, अररिया, सुपौल, सहरसा, मधेपूरा के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान किसानों एवं मखाना व्यवसायियों के साथ भाग लिये। बिहार से मखाना निर्यातको बढ़ावा देने हेतु कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के द्वारा भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय, पूर्णियाँ में आयोजित एकदिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम -सह-हितधारक (स्टेकहोल्डर) कार्यशाला में भारत के विभिन्न राज्यों से मखाना व्यपारियों ने भाग लिया। जिसमें क्रमशः श्री वरूण गुप्ता, ब्लेकनट एग्रीफूड मशीनरी प्रा॰ लि॰, अम्बाला, सारिकामल्होत्रा बिजनस स्टेन्र्डड नई दिल्ली, ब्रजेश कुमार शर्मा जानकी नन्दन

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