Tuesday, May 21, 2019

Lifestyle

A wonderful serenity has taken possession of my entire soul, like these sweet mornings of spring which I enjoy with my whole heart.

स्वक्ष मुख- स्वास्थ्य जीवन यही है वशी ओरोफेशियल केयर का सपना

पटना से दीपक कुमार की रिपोर्ट।।पटना: वशी ओरोफेशियल केयर द्वारा में बिहार की राजधानी पटना में मुख रोगों का अत्याधुनिक...

Continue Reading

#ससुराल जाने के पहले स्वरोजगार का हुनर सीख रही है बेटियां

#रितु_जयसवाल बिहार के #सीतामढ़ी जिले के सिंहवाहिनी पंचायत की मुखिया है. इस बार के लोकसभा चुनाव में एक राष्ट्रीय दल...

Continue Reading

विश्व पृथ्वी दिवस केअवसर पर स्वच्छ भारत अभियान अन्तर्गतर गाजर घास उन्मूलन हेतु प्राचार्य ने दिलायी स्वच्छता की शपथ

विश्व पृथ्वी दिवस 22 अप्रैल 2019 के अवसर पर स्वच्छ भारत अभियान अन्तर्गतर गाजर घास उन्मूलन हेतु प्राचार्य ने दिलायी स्वच्छता...

Continue Reading

विश्व पृथ्वी दिवस पर होटल द पनाश ने पौधारोपण कर लिया पर्यावरण संरक्षण का संकल्प

होटल में ग्राहकों को मिलेगा 10 प्रतिशत की छूट पटना : विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर सोमवार को होटल...

Continue Reading

लाएंस क्लब पाटलीपूत्र आस्था के कार्यकर्म के तहत फ्री हेल्थ कैंप

लाएंस क्लब पाटलीपूत्र आस्था के कार्यकर्म के तहत फ्री हेल्थ कैंप चकैया -मकैया गाँव प्रखण्ड पातेपूर ,ऊजियारपुर में अझत सेवा...

Continue Reading

जानिए क्यों खास है हड्डी नस रोग, जोड़ प्रत्यारोपण एवं बाल विकास विशेषज्ञ डॉ सुनीत रंजन

आज हम आपको एक ऐसे चिकित्सक से मिलवाने जा रहे हैं जिन्होंने बाल विकलांगता पर शोध करने के बाद देश...

Continue Reading

कृषि कालेज के परिसर में विशेषज्ञ किसानों के वैज्ञानिकों के बीच खेती से जुडे कई समसामयिक सवालों परर चर्चा

भोला पासवान शास्त्री कृषि कालेज के परिसर में इलाके के कुछ विशेषज्ञ किसानों और कालेज के कृषि वैज्ञानिकों के बीच खेती की चुनौतियों से जुडे कईसमसामयिक सवालों पर सीधी और जोरदार चर्चा आयोजित हुई । इस विशेष वाद.संवाद का सत्र स्थानीय किसानों और बुद्धिजीवियों की पहल पर कृषि कालेज केप्राचार्य डा पारसनाथ ने आयोजित कराया इस कृषि संवाद कार्यक्रम में अनुभवी किसानों और वैज्ञानिकों ने अपने अपने अनुभव और तर्क के आधार पर खेती से जुडेकई सवालों पर सकारात्मक चर्चा की और कृषि क्षेत्र की विविधताओं को सबने स्वीकार किया साथ हीं जैविक खेती बनाम रासायनिक खेती के सवालों पर भी सटीकजबाव एक दूसरे से हासिंल किये । भोलापासवान कृषि महाविद्यालय के चर्चा कक्ष में यह आयोजन अब तक के कृषि आयोजनों और संगोष्ठियों से अलग हटकर थाजहां अनुभवी किसानों के जमीनी अनुभव एक ओर सामने आ रहे थे तो दूसरी ओर कृषि वैज्ञानिकों के तकनीकी और वैज्ञानिक अनुभवों को सामने रखा जा रहा था ।चर्चा की शुरुआत करते हुए पूर्णिया और कटिहार जिले में कृषि का अनुभव रखने वाले प्रगतिशील किसान बीण्केण्ठाकुर ने कृषि के क्षेत्र की ज्वलंत समस्याओं कीगिनतियां कराई और बताया कि कई कारणों से आज की तारीख में जमीन की ऊपजाऊ ताकत का दोहन.शोषण किसान मजबूरन कर रहे हैं क्योंकि उनके सामनेकृषि उत्पादन और आमदनी बढाने की होड का जरुरी उलझन होता है । बीण्केण्ठाकुर ने जमीन की उर्वराशक्ति और अनाजों से आ रही मानव बीमारियों को दूररखने के लिए पारंपरिक खेती को उचित बताया पर उत्पादन की जरुरत को ही समस्या और उलझन भी करार दिया । पूर्णिया के रामनगर गांव के प्रगतिशील किसानऔर हिमकर मिश्रा ने चर्चा को आगे बढाते हुए कहा कि कोसी की बलुई और बंजर जमीन को शून्य जुताई के आधार पर पारंपरिक खेती के सहारे उपजाऊ बनायाजा सकता है । उन्होने रामनगर गांव में अपने एक बडे भूखंड पर चल रही ऋषि खेती जो मुख्यरुप से जैविक खेती ही है उसके लाभकारी और तकनीकी पक्षों पर चर्चाकी जिससे यह सामने आया कि जैविक खेती के सहारे जमीन की ऊर्वराशक्तिएबागवानी और औषधीय उत्पादन का काम सफलतापूर्वक किया जा सकता है पर यहांभी कृषि उत्पादन बढाने की चुनौती का पूरा समाधान नही मिलता। चर्चा के दौरान जैविक खेती के विशेषज्ञ संजय बनर्जी ने बताया कि जैविक खेती भले ही उत्पादनकी होड में शामिल नही हो सकती पर खेती की मूल प्रवृति और स्वास्थ्यवर्धक कृषि उत्पादन का आधार इसी में निहित है । उन्होने इलाके में दलहनी की घटती खेतीपर चिंता जताई और ऐसे दौर में उनके द्वारा अरहर की खेती किये जाने के सफल प्रयोग की जानकारी दी गयी । साहित्यकार चन्द्रशेखर मिश्र ने इस मौके पर कहाकि जैविक खेती बनाम रासायनिक खेती का

Continue Reading

​कृषि उपादान विक्रेताओं के लिए समेकित पोषक तत्व प्रबंधन विषय पर 15 दिवसीय सर्टिफिकेट

दिनांक 29 जनवरी 2019 को भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय, पूर्णियाँ में चलाये जा रहे कृषि उपादान विक्रेताओं के लिए समेकित पोषक तत्व प्रबंधन विषय पर 15 दिवसीय सर्टिफिकेट कोर्स हेतू प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रमाण पत्र वितरण एवं समापन समारोह के मुख्य अतिथि डाॅ॰ आर॰ के॰ सोहाने, निदेशक प्रसार शिक्षा एंव विशिष्ट अतिथि डाॅ॰आई॰ एस॰ सोलंकी, निदेशक, अनुसंधान, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर भागलपुर ने प्रशिक्षणार्थियों से फीड बैक लिया। इस दौरान प्रशिक्षणार्थियों ने कहा कि समेकित पोषक तत्वप्रबंधन के साथ साथ समेकित खरपतवार, कीट एवं पादप रोग नाशी विषयों को भी शामिल किया जाय ताकि हम सभी रहे कृषि उपादान विक्रेताओं को रासायनिक उर्वरकों के साथसाथ खरपतवार, कीट एवं पादप रोग नाशी दवाओं को विक्र्रय करने का लाईसेंस भी मिल सकेगा। तभी किसानों को एक ही दुकान से कृषि एवं कृषि से सम्बन्धित सभी तरह के कृषिउपादान उपलब्ध कराना संभव हो पायेगा। इस अवसर पर सह अधिष्ठाता-सह-प्राचार्य डा॰ पारसनाथ, के द्वारा फूलों का गुलदस्ता एवं अंगवस्त्र, के द्वारा मुख्य अतिथि डाॅ॰ आर॰ के॰सोहाने, निदेशक प्रसार शिक्षा एंव विशिष्ट अतिथि डाॅ॰ आई॰ एस॰ सोलंकी, निदेशक, अनुसंधान, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर भागलपुर को पुष्पगुच्छ एवं अंग वस्त्र देकरसम्मानित किया गया।डाॅ0 पारस नाथ, सह अधिष्ठाता-सह-प्राचार्य, भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय, पूर्णियाँ ने चल रहे प्रशि़क्षण कार्यक्रम के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदानकी। मुख्य अतिथि डाॅ॰ आर॰ के॰ सोहाने, निदेशक प्रसार शिक्षा ने अपने सम्बोधन में भारत वर्ष में प्रथम प्रशिक्षण के सफल आयोजन हेतु प्राचार्य एवं उनके टीम को बधाई देते हुएकहा कि भविष्य में कृषि उपादान बिक्रेताओं के साथ साथ कृषि उत्पाद बनाने वाली कम्पनियों का कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा जिससे किसानों, कृषि उत्पाद बिक्रेताओं एवंकम्पनियों के बीच माँग एवं आपूर्ति का बेहतर समन्वयन होगा और किसानों को गुणवत्ता युक्त कृषि उत्पाद ससमय उपलब्ध हो पायेगा। साथ ही साथ उन्होंने यह भी कहा कि समेकितपोषक तत्व प्रबंधन विषय पर जानकारी प्राप्त करने के बाद आप सभी की नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि भारत सरकार के द्वारा बनाये गये नियम के अनुसार खाद एवं उर्वरक कासंतुलित प्रयोग करने हेतु किसानों को उचित सलाह प्रदान की जाय। तभी यह प्रशिक्षण सफल हो सकेगा। विशिष्ट अतिथि डाॅ॰ आई॰ एस॰ सोलंकी, निदेशक, अनुसंधान, बिहार कृषिविश्वविद्यालय, सबौर भागलपुर ने अपने सम्बोधन में समेकित पोषक तत्व प्रबंधन विषय पर 15 दिवसीय सर्टिफिकेट कोर्स अन्तर्गत प्रतिभागियों द्वारा प्रदान किये गये फीड बैक सेप्रसन्नता व्यक्त की तथा उन्होंने उनके उज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि आप सभी गुणवत्ता युक्त रासायनिक उर्वरक का ही विक्रय करें एवं किसानों को उचित सलाह देजिससे मृदा स्वास्थ्य हमेंशा के लिए खेती लायक उपयुक्त बना रहे। डा0 पंकज कुमार यादव, नोडल पदाधिकारी-सह-समन्वयक सहायक एंव प्राध्यापक-सह-कनीय वैज्ञानिक मृदाविज्ञान एवं कृषि रसायन विज्ञान विभाग द्वारा पूरे प्रशिक्षण की आख्या प्रस्तुत करते हुए विधिवत जानकारी प्रदान करते हुए बताया कि समेकित पोषक तत्व प्रबंधन विषय पर 15 दिवसीय सर्टिफिकेट कोर्स अन्तर्गत कृषि की आधुनिक तकनीक की जानकारी के लिए 15 दिनों तक बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर की विभिन्न संस्थाओं के मृदा वैज्ञानिकों जैसेकृषि विज्ञान केन्द्र कटिहार, सिंचाई अनुसंधान केन्द्र अररिया, सिंचाई अनुसंधान केन्द्र मधेपुरा, जूट अनुसंधान केन्द्र कटिहार, बिहार कृषि महाविद्यालय, सबौर, डाॅ॰ कलाम कृषिमहाविद्यालय, किशनगंज एवं भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय, पूर्णियाँ के कुल 16 मृदा वैज्ञानिकों ने कुल 44 विषयों पर निर्धारित पाठ्यक्रम के अन्तर्गत सैद्धांतिक एवंप्रायोगिक प्रशिक्षण प्रदान किये। उन्होेने यह भी बताया कि एक्पोजर विजिट के लिए सभी प्रतिभागियों को दो दिनों तक बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर की विभिन्न इकाइयों का भ्रमणभी कराया गया। जिसमें प्रमुख रुप से जैव उर्वरक उत्पादन ईकाई, एजोला, नील हरित शैवाल, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट, मृदा परिक्षण प्रयोगशाला, टीशु कल्चर लैब आदि का भ्रमणकराकर विस्तार पूर्वक सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक जानकारी प्रदान की गई, जो प्रतिभागियों के लिए काफी लाभकारी रहा। डा0 पंकज कुमार यादव, नोडल पदाधिकारी-सह-समन्वयकने कहा कि यदि भविष्य के लिए हम सभी को स्वस्थ रहना है तो बिना जानकारी एवं मिट्टी जाँच के किसी भी प्रकार का रासायनिक पदार्थ एवं उर्वरक का प्रयोग मिट्टी में न करे, क्योंकिमिट्टी के स्वास्थ्य से ही हम सभी का स्वास्थ्य का सीधा सम्बन्ध है। कार्यक्रम के समापन से पूर्व सभी प्रशिक्षणार्थियों की लिखित एवं मौखिक परीक्षा ली गई। परीक्षा के परिणाम केआधार पर सभी प्रतिभागियों को निर्णायक समिति द्वारा प्रमाण प्रदान करने की संस्तुति की गई। इस अवसर पर समेकित पोषक तत्व प्रबंधन विषय पर 15 दिवसीय सर्टिफिकेट कोर्स अन्तर्गत उपादान ं प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे प्रतिभागियों में क्रमशः समरेन्द्र शुधांशु, मो॰फैजान आलम, मो॰ इसमाइल आलम, शैलेन्द्र कुमार, अमर कुमार यादव, श्रवण कुमार, राहुल कुमार, अमित कुमार, मो॰ नाहिद अली, मो॰ सद्दाम हुसैन, सुमन कुमारी, रुबि कुमारी, निक्की कुमारी, दुर्गा कुमार, मुकेश कुमार आजाद, नीतीश कुमार, मो॰ इम्तियाज, मो॰ तौफीक आलम, दीपक कुमार आजाद, शिवजी चैधरी, रोहित राज, मो॰ सोहेल अहमद, अखिलेश्वर सिंह, मो॰ अब्दुल गफूर, मो॰ मनोवर आलम, मो॰ अब्दुल कयूम, बरूण कुमार, आशिष कुमार, जमाल उद्धीन, मो॰ आसिफ इकबाल आदि कुल 30 प्रशिक्षणार्थियों नेउत्साह पूर्वक प्रशिक्षण प्राप्त कर प्रमाण पत्र हासिल किया। इस कड़ी में सबसे अधिक प्रतिभागी 22 कटिहार, एक मधेपुरा, एक अररिया एवं 6 प्रतिभागी पूर्णियाँ जिले के विभिन्नप्रखण्डों से सम्मिलित हुए। इस अवसर पर महाविद्यालय के वैज्ञानिक डा॰ जनार्दन प्रसाद, डा॰ पंकज कुमार यादव, डा॰ अनिल कुमार, डा॰ रुबी साहा, डा॰ रवि केसरी, डाॅ॰ माचा उदय कुमार, श्री मणिभूषण,डाॅ॰ राधेश्याम, डाॅ॰ श्याम बाबू साह एवं कर्मचारियों आदि ने अपना सहयोग प्रदान किया। इस कार्यक्रम का संचालन डाॅ॰ अनिल कुमार एवं धन्यवाद डा॰ रुबी साहा, द्वारा किया गया।

Continue Reading

शिक्षण कार्यक्रम के तीसरे एवं चैथे दिन कार्यक्रम आयोजित

दिनांक 17 एवं 18 जनवरी 2019 को भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय, पूर्णियाँ में संयुक्त सचिव भारत सरकार, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, कृषि सहकारिताएवं किसान कल्याण विभाग, के निर्देश पर चलाये जा रहे कृषि उपादान विक्रेताओं के लिए समेकित पोषक तत्व प्रबंधन विषय पर 15 दिवसीय सर्टिफिकेट कोर्स हेतू प्रशिक्षणकार्यक्रम के तीसरे एवं चैथे दिन फीड बैक एवं तकनिकी सत्र का आयोजन नोडल पदाधिकारी-सह-समन्वयक डा0 पंकज कुमार यादव, सहायक प्राध्यापक-सह-कनीय वैज्ञानिक,मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन विज्ञान विभाग द्वारा किया गय दो दिनों में पूर्णियाँ, अररिया एवं किशनगंज के मृदा विशेषज्ञों द्वारा लगातार प्रतिभागियों को जानकारी प्रदान की जा रहीहै। तकनीकी सत्र में सिंचाई अनुसंधान केन्द्र अररिया के वरीय मृदा वैज्ञानिक डाॅ॰ विजयकान्त मिश्रा ने उर्वरकों में मिलावट की पहचान के बारे में तथा मिलावट के तत्वों पर विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि भारतीय कृषि में उर्वरकों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। भारत केवल चीन के बाद दुनिया में उर्वरकों का प्रयोग करने वाला दूसरासबसे बड़ा देश है। किसान सबसे ज्यादा उर्वरको में यूरिया, डीएपी, एमओपी, एनपीके एसएसपी, जिंक सल्फेट, कॉपर सल्फेट आदि का प्रयोग प्रमुख रुप से करता हैं एक उर्वरकको मिलावटी तभी माना जाएगा, यदि इसमें कोई पोषक तत्वों को खत्म करने या घटाने की संभावना है या उर्वरक ‘‘निर्धारित मानक‘‘ के अनुरूप नहीं है। यदि यूरिया में मिलावट कापता लगाना है तो एक परीक्षण ट्यूब में 1 ग्राम उर्वरक लें और सामग्री को भंग करने के लिए 5 मिलीलीटर आसुत पानी जोड़ें। सिल्वर नाइट्रेट समाधान की 5-6 बूंदें जोड़ें। सफेदप्रक्षेपण का गठन इंगित करता है कि सामग्री मिल्केटेड है। किसी भी उपद्रव का गैर गठन इंगित करता है कि यूरिया शुद्ध है। डाई अमोनियम फास्फेट एवं म्यूरेट आॅफ पोटाश मेंमिलावट का पता लगाना है तो 1 ग्राम उर्वरक लें, 5 मिलीलीटर आसुत पानी मिलायें और अच्छी तरह हिलाएं। फिर 1 मिलीलीटर नाइट्रिक एसिड डालें और फिर हिलायें। यदि यह भंगहो जाता है और अर्द्ध पारदर्शी विलियन बनाता है तो डीएपी शुद्ध है और यदि कोई अघुलनशील सामग्री बनी हुई है, तो यह मिलावटी है। इसी तरह फिल्टर पेपर के उपयोग के साथ, छिद्र में 1 मिलीलीटर सिल्वर नाइट्रेट लें। यदि पीले प्रक्षेपण का गठन नाइट्रिक एसिड की 5-6 बूंदों में भी भंग हो जाता है तो यह सामग्री में फॉस्फेट की उपस्थिति की पुष्टि करता है।नमूना और रगड़ने में छोटी मात्रा में चूने को मिलाकर, उतेजित अमोनिया गैस की गंध नाइट्रोजन की उपस्थिति को इंगित करती है। छिद्र में कोबाल्ट नाइट्राइट अभिकर्मक की 5-6 बूंदों को जोड़कर और पीले रंग के प्रक्षेपण के गठन से उर्वरकों में पोटेशियम की उपस्थिति का संकेत मिलता है। प्रक्षेपण का अनुपस्थिकी इंगित करता है। आवश्यक वस्तुओंअधिनियम 1955 की धारा 3 के तहत जारी उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 उर्वरक निर्माताओं, आयातकों और डीलरों के अनिवार्य पंजीकरण के लिए प्रदान करता है, देश में निर्मित /आयातित और बेचे जाने वाले सभी उर्वरकों और उर्वरक मिश्रण का निर्माण संबंधी उसके पैंकिंग और उर्वरक बैंग लेविलिंग लगा होता है परिवर्तन एजेंसी की नियुक्ति का काम गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशालाओं की स्थापना करना और गैर-मानक , नकली , मिश्रित उर्वरकों के निर्माण , आयात और बिक्री पर प्रतिबंध लगाना होता है। इसके अलावा इसका कामडिलरों और उर्वरक मिश्रण निर्माताओं के प्राधिकरण पत्र ,पंजीकरण प्रमाणपत्रों को रद्द करने और ईसीए के तहत अपराधियों के लिए जुर्माना के साथ तीन महीने से सात साल तककारावास की सजा प्रदान करता है। एफसीओ अपराध को भी संज्ञेय और गैर जमानती घोषित किया गया है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विशेषज्ञ के रुप में भाग लेने आए डाॅ॰ भोलानाथसाह, मृदा वैज्ञानिक, डाॅ॰ कलाम कृषि महाविद्यालय, किशनगंज द्वारा प्रतिभागियों को गोबर की खाद को बनाने की विधि के साथ साथ उपयोग पर विस्तार पूर्वक जानकारी प्रदान की।उन्होंने बताया कि खाद शब्द की उत्पत्ति, संस्कृत के ‘‘खाद्य‘‘ शब्द से हुई है और जिसका शाब्दिक अर्थ है-भोजन। अर्थत्, फसल अवशेष और अपशिष्ट पदार्थो के अपघटन से प्राप्तहोने वाले वे पदार्थ जिनका प्रयोग पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की आपूर्ति के लिए किया जाता है- जैविक खाद कहलाता है। मिट्टी में जैविक खदों का प्रयोग उतना हीआवश्यक है जितना कि नवजात शिशु के लिए माँ का दूध। जिस प्रकार माँ का दूध बच्चों का विभिन्न प्रकार की बिमारियों से बचाने के साथ-साथ उन्हें संपूर्ण पोषण प्रदान करता है, ठीक उसी प्रकार, जैविक खाद मिट्टी की भौतिक, रसायनिक एवं जैविक गुणों का सुधारने के अतिरिक्त मिट्टी में पौधों के लिए आवश्यक समस्त पोषक तत्वो की आपूर्ति करता है।पशुओं के मल-मूत्र एवं बिछावन के अपघटन उपरान्त प्राप्त खाद को गोबर की खाद कहते हैं । इसमें समान्यतयाः 0ण्5ःनत्रजन, 0ण्5ःस्फुर तथा 0ण्5ःपोटाश पाया जाता है ।इसके अतिरिक्त उसमें सूक्ष्मांत्रिक तत्व अल्प मात्रा में विद्यमान रहती है । गोबर का खाद बनाने के लिए पशुशाला के पास 20ष्ग 5ष्ग 3ष्आकार को गडढा खोद लेते हैं । इसके आधेहिस्से में गोबर, मूत्र एवं बिछावन के मिश्रण को डालते रहते हैं । जब यह डेढ़ फीट की ऊँचाई तक भ्र जाय तब उपर से मिट्टी से ढक देते हैं । अब गडढे के शेष हिस्से को गोबर, मूत्र एवंबिछावन के मिश्रण से भरते हैं । जब तक यह हिस्सा भरता है तब तक पहले आधे हिस्सा का गोबर खाद में बदल जाता है जिसका खेती में प्रयोग कर लेते हैं । यदि गोबर का प्रयोग बादमें करना हो तो इसमें थोङा जिप्सम मिला देते हैं ।तकनीकी सत्र में डा0 पंकज कुमार यादव, सहायक प्राध्यापक-सह-कनीय वैज्ञानिक, मृदा विज्ञान एवं विभागाध्यक्ष डाॅ॰ जनार्दनप्रसाद द्वारा फसलों की बुआई से पूर्व मिट्टी का नमूना प्राप्त करने की विधि विस्तार पूर्वक जानकारी के साथ साथ प्रायोगिक कार्य कराया गया। इस अवसर पर डाॅ0 पारस नाथ, सहअधिष्ठाता-सह-प्राचार्य, भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय, पूर्णियाँ ने चल रहे प्रशि़क्षण कार्यक्रम प्रशिक्षणर्थियों से फीडबैक लिया एवं प्रतिभागियों को कीटनाशकों के बारे मेंजानकारी प्रदान की।

Continue Reading
Page 1 of 14 1214