Saturday, July 20, 2019

Food

A wonderful serenity has taken possession of my entire soul, like these sweet mornings of spring which I enjoy with my whole heart.

कृषि महाविद्यालय, पूर्णियाँ ​केन्द्रीय बागवानी परिक्षण केन्द्र, आइगिनिया, भुवनेश्वर, ओड़िशा का अखिल भारतीय शैक्षणिक

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थन नई दिल्ली के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्यरत केन्द्रीय बागवानी परिक्षण केन्द्र, आइगिनिया, भुवनेश्वर, ओड़िशा का अखिल...

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कृषि कालेज के परिसर में विशेषज्ञ किसानों के वैज्ञानिकों के बीच खेती से जुडे कई समसामयिक सवालों परर चर्चा

भोला पासवान शास्त्री कृषि कालेज के परिसर में इलाके के कुछ विशेषज्ञ किसानों और कालेज के कृषि वैज्ञानिकों के बीच खेती की चुनौतियों से जुडे कईसमसामयिक सवालों पर सीधी और जोरदार चर्चा आयोजित हुई । इस विशेष वाद.संवाद का सत्र स्थानीय किसानों और बुद्धिजीवियों की पहल पर कृषि कालेज केप्राचार्य डा पारसनाथ ने आयोजित कराया इस कृषि संवाद कार्यक्रम में अनुभवी किसानों और वैज्ञानिकों ने अपने अपने अनुभव और तर्क के आधार पर खेती से जुडेकई सवालों पर सकारात्मक चर्चा की और कृषि क्षेत्र की विविधताओं को सबने स्वीकार किया साथ हीं जैविक खेती बनाम रासायनिक खेती के सवालों पर भी सटीकजबाव एक दूसरे से हासिंल किये । भोलापासवान कृषि महाविद्यालय के चर्चा कक्ष में यह आयोजन अब तक के कृषि आयोजनों और संगोष्ठियों से अलग हटकर थाजहां अनुभवी किसानों के जमीनी अनुभव एक ओर सामने आ रहे थे तो दूसरी ओर कृषि वैज्ञानिकों के तकनीकी और वैज्ञानिक अनुभवों को सामने रखा जा रहा था ।चर्चा की शुरुआत करते हुए पूर्णिया और कटिहार जिले में कृषि का अनुभव रखने वाले प्रगतिशील किसान बीण्केण्ठाकुर ने कृषि के क्षेत्र की ज्वलंत समस्याओं कीगिनतियां कराई और बताया कि कई कारणों से आज की तारीख में जमीन की ऊपजाऊ ताकत का दोहन.शोषण किसान मजबूरन कर रहे हैं क्योंकि उनके सामनेकृषि उत्पादन और आमदनी बढाने की होड का जरुरी उलझन होता है । बीण्केण्ठाकुर ने जमीन की उर्वराशक्ति और अनाजों से आ रही मानव बीमारियों को दूररखने के लिए पारंपरिक खेती को उचित बताया पर उत्पादन की जरुरत को ही समस्या और उलझन भी करार दिया । पूर्णिया के रामनगर गांव के प्रगतिशील किसानऔर हिमकर मिश्रा ने चर्चा को आगे बढाते हुए कहा कि कोसी की बलुई और बंजर जमीन को शून्य जुताई के आधार पर पारंपरिक खेती के सहारे उपजाऊ बनायाजा सकता है । उन्होने रामनगर गांव में अपने एक बडे भूखंड पर चल रही ऋषि खेती जो मुख्यरुप से जैविक खेती ही है उसके लाभकारी और तकनीकी पक्षों पर चर्चाकी जिससे यह सामने आया कि जैविक खेती के सहारे जमीन की ऊर्वराशक्तिएबागवानी और औषधीय उत्पादन का काम सफलतापूर्वक किया जा सकता है पर यहांभी कृषि उत्पादन बढाने की चुनौती का पूरा समाधान नही मिलता। चर्चा के दौरान जैविक खेती के विशेषज्ञ संजय बनर्जी ने बताया कि जैविक खेती भले ही उत्पादनकी होड में शामिल नही हो सकती पर खेती की मूल प्रवृति और स्वास्थ्यवर्धक कृषि उत्पादन का आधार इसी में निहित है । उन्होने इलाके में दलहनी की घटती खेतीपर चिंता जताई और ऐसे दौर में उनके द्वारा अरहर की खेती किये जाने के सफल प्रयोग की जानकारी दी गयी । साहित्यकार चन्द्रशेखर मिश्र ने इस मौके पर कहाकि जैविक खेती बनाम रासायनिक खेती का

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​कृषि उपादान विक्रेताओं के लिए समेकित पोषक तत्व प्रबंधन विषय पर 15 दिवसीय सर्टिफिकेट

दिनांक 29 जनवरी 2019 को भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय, पूर्णियाँ में चलाये जा रहे कृषि उपादान विक्रेताओं के लिए समेकित पोषक तत्व प्रबंधन विषय पर 15 दिवसीय सर्टिफिकेट कोर्स हेतू प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रमाण पत्र वितरण एवं समापन समारोह के मुख्य अतिथि डाॅ॰ आर॰ के॰ सोहाने, निदेशक प्रसार शिक्षा एंव विशिष्ट अतिथि डाॅ॰आई॰ एस॰ सोलंकी, निदेशक, अनुसंधान, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर भागलपुर ने प्रशिक्षणार्थियों से फीड बैक लिया। इस दौरान प्रशिक्षणार्थियों ने कहा कि समेकित पोषक तत्वप्रबंधन के साथ साथ समेकित खरपतवार, कीट एवं पादप रोग नाशी विषयों को भी शामिल किया जाय ताकि हम सभी रहे कृषि उपादान विक्रेताओं को रासायनिक उर्वरकों के साथसाथ खरपतवार, कीट एवं पादप रोग नाशी दवाओं को विक्र्रय करने का लाईसेंस भी मिल सकेगा। तभी किसानों को एक ही दुकान से कृषि एवं कृषि से सम्बन्धित सभी तरह के कृषिउपादान उपलब्ध कराना संभव हो पायेगा। इस अवसर पर सह अधिष्ठाता-सह-प्राचार्य डा॰ पारसनाथ, के द्वारा फूलों का गुलदस्ता एवं अंगवस्त्र, के द्वारा मुख्य अतिथि डाॅ॰ आर॰ के॰सोहाने, निदेशक प्रसार शिक्षा एंव विशिष्ट अतिथि डाॅ॰ आई॰ एस॰ सोलंकी, निदेशक, अनुसंधान, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर भागलपुर को पुष्पगुच्छ एवं अंग वस्त्र देकरसम्मानित किया गया।डाॅ0 पारस नाथ, सह अधिष्ठाता-सह-प्राचार्य, भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय, पूर्णियाँ ने चल रहे प्रशि़क्षण कार्यक्रम के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदानकी। मुख्य अतिथि डाॅ॰ आर॰ के॰ सोहाने, निदेशक प्रसार शिक्षा ने अपने सम्बोधन में भारत वर्ष में प्रथम प्रशिक्षण के सफल आयोजन हेतु प्राचार्य एवं उनके टीम को बधाई देते हुएकहा कि भविष्य में कृषि उपादान बिक्रेताओं के साथ साथ कृषि उत्पाद बनाने वाली कम्पनियों का कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा जिससे किसानों, कृषि उत्पाद बिक्रेताओं एवंकम्पनियों के बीच माँग एवं आपूर्ति का बेहतर समन्वयन होगा और किसानों को गुणवत्ता युक्त कृषि उत्पाद ससमय उपलब्ध हो पायेगा। साथ ही साथ उन्होंने यह भी कहा कि समेकितपोषक तत्व प्रबंधन विषय पर जानकारी प्राप्त करने के बाद आप सभी की नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि भारत सरकार के द्वारा बनाये गये नियम के अनुसार खाद एवं उर्वरक कासंतुलित प्रयोग करने हेतु किसानों को उचित सलाह प्रदान की जाय। तभी यह प्रशिक्षण सफल हो सकेगा। विशिष्ट अतिथि डाॅ॰ आई॰ एस॰ सोलंकी, निदेशक, अनुसंधान, बिहार कृषिविश्वविद्यालय, सबौर भागलपुर ने अपने सम्बोधन में समेकित पोषक तत्व प्रबंधन विषय पर 15 दिवसीय सर्टिफिकेट कोर्स अन्तर्गत प्रतिभागियों द्वारा प्रदान किये गये फीड बैक सेप्रसन्नता व्यक्त की तथा उन्होंने उनके उज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि आप सभी गुणवत्ता युक्त रासायनिक उर्वरक का ही विक्रय करें एवं किसानों को उचित सलाह देजिससे मृदा स्वास्थ्य हमेंशा के लिए खेती लायक उपयुक्त बना रहे। डा0 पंकज कुमार यादव, नोडल पदाधिकारी-सह-समन्वयक सहायक एंव प्राध्यापक-सह-कनीय वैज्ञानिक मृदाविज्ञान एवं कृषि रसायन विज्ञान विभाग द्वारा पूरे प्रशिक्षण की आख्या प्रस्तुत करते हुए विधिवत जानकारी प्रदान करते हुए बताया कि समेकित पोषक तत्व प्रबंधन विषय पर 15 दिवसीय सर्टिफिकेट कोर्स अन्तर्गत कृषि की आधुनिक तकनीक की जानकारी के लिए 15 दिनों तक बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर की विभिन्न संस्थाओं के मृदा वैज्ञानिकों जैसेकृषि विज्ञान केन्द्र कटिहार, सिंचाई अनुसंधान केन्द्र अररिया, सिंचाई अनुसंधान केन्द्र मधेपुरा, जूट अनुसंधान केन्द्र कटिहार, बिहार कृषि महाविद्यालय, सबौर, डाॅ॰ कलाम कृषिमहाविद्यालय, किशनगंज एवं भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय, पूर्णियाँ के कुल 16 मृदा वैज्ञानिकों ने कुल 44 विषयों पर निर्धारित पाठ्यक्रम के अन्तर्गत सैद्धांतिक एवंप्रायोगिक प्रशिक्षण प्रदान किये। उन्होेने यह भी बताया कि एक्पोजर विजिट के लिए सभी प्रतिभागियों को दो दिनों तक बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर की विभिन्न इकाइयों का भ्रमणभी कराया गया। जिसमें प्रमुख रुप से जैव उर्वरक उत्पादन ईकाई, एजोला, नील हरित शैवाल, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट, मृदा परिक्षण प्रयोगशाला, टीशु कल्चर लैब आदि का भ्रमणकराकर विस्तार पूर्वक सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक जानकारी प्रदान की गई, जो प्रतिभागियों के लिए काफी लाभकारी रहा। डा0 पंकज कुमार यादव, नोडल पदाधिकारी-सह-समन्वयकने कहा कि यदि भविष्य के लिए हम सभी को स्वस्थ रहना है तो बिना जानकारी एवं मिट्टी जाँच के किसी भी प्रकार का रासायनिक पदार्थ एवं उर्वरक का प्रयोग मिट्टी में न करे, क्योंकिमिट्टी के स्वास्थ्य से ही हम सभी का स्वास्थ्य का सीधा सम्बन्ध है। कार्यक्रम के समापन से पूर्व सभी प्रशिक्षणार्थियों की लिखित एवं मौखिक परीक्षा ली गई। परीक्षा के परिणाम केआधार पर सभी प्रतिभागियों को निर्णायक समिति द्वारा प्रमाण प्रदान करने की संस्तुति की गई। इस अवसर पर समेकित पोषक तत्व प्रबंधन विषय पर 15 दिवसीय सर्टिफिकेट कोर्स अन्तर्गत उपादान ं प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे प्रतिभागियों में क्रमशः समरेन्द्र शुधांशु, मो॰फैजान आलम, मो॰ इसमाइल आलम, शैलेन्द्र कुमार, अमर कुमार यादव, श्रवण कुमार, राहुल कुमार, अमित कुमार, मो॰ नाहिद अली, मो॰ सद्दाम हुसैन, सुमन कुमारी, रुबि कुमारी, निक्की कुमारी, दुर्गा कुमार, मुकेश कुमार आजाद, नीतीश कुमार, मो॰ इम्तियाज, मो॰ तौफीक आलम, दीपक कुमार आजाद, शिवजी चैधरी, रोहित राज, मो॰ सोहेल अहमद, अखिलेश्वर सिंह, मो॰ अब्दुल गफूर, मो॰ मनोवर आलम, मो॰ अब्दुल कयूम, बरूण कुमार, आशिष कुमार, जमाल उद्धीन, मो॰ आसिफ इकबाल आदि कुल 30 प्रशिक्षणार्थियों नेउत्साह पूर्वक प्रशिक्षण प्राप्त कर प्रमाण पत्र हासिल किया। इस कड़ी में सबसे अधिक प्रतिभागी 22 कटिहार, एक मधेपुरा, एक अररिया एवं 6 प्रतिभागी पूर्णियाँ जिले के विभिन्नप्रखण्डों से सम्मिलित हुए। इस अवसर पर महाविद्यालय के वैज्ञानिक डा॰ जनार्दन प्रसाद, डा॰ पंकज कुमार यादव, डा॰ अनिल कुमार, डा॰ रुबी साहा, डा॰ रवि केसरी, डाॅ॰ माचा उदय कुमार, श्री मणिभूषण,डाॅ॰ राधेश्याम, डाॅ॰ श्याम बाबू साह एवं कर्मचारियों आदि ने अपना सहयोग प्रदान किया। इस कार्यक्रम का संचालन डाॅ॰ अनिल कुमार एवं धन्यवाद डा॰ रुबी साहा, द्वारा किया गया।

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7 फ़ीसदी आबादी के राजनैतिक भागीदारी लिए एकजुट हुए कानू हलवाई

पटना।जैसे-जैसे बिहार में लोकसभा चुनाव नजदीक आते जा रहा है वैसे-वैसे जातियों की जमात गोलबंद होते जा रही है इसी...

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कृषि महाविद्यालय, में महिला किसान दिवस सह संरक्षित खेती विषयक परिचर्चा का आयोजन

भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय, पूर्णियाँ में दिनांक 15 अक्टूबर, 2018 को अन्तराष्ट्रीय मक्का एवं गेंहूँ अनुसंधान केन्द्र, मैक्सिको के द्वारा वित्त पोषित पूर्वीगंागेय क्षेत्र में मौसम अनुकूल टिकाऊ खेती (एस॰ आर॰ एफ॰ एस॰ आई॰) परियोजना के अन्तर्गत महिला किसान दिवस सह संरक्षित खेती विषयक परिचर्चा काआयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिले के पाँच प्रखण्ड के महिला कृषक, कृषि वैज्ञानिक, छात्र-छात्राओं एवं कर्मचारियों ने भाग लिया। इस अवसर पर जीरो टीलेजतकनीक के द्वारा विभिन्न फसलों धान, गेहूँ, मक्का इत्यादि की खेती करने के लिए छः महिला किसानों को शाल देकर सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम काउद्घाटन करते हुए माननीय श्रीमति क्रांति सिंह, अध्यक्षा, जिला परिषद, पूर्णियाँ ने महिला कृषकों को आहवान किया कि खेती में नई तकनीक अपनाकर पशुधन एवंअन्य कृषि विधाओं को अपनाकर स्वावलंबी होने तथा अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करें। उन्होंने महिला कृषकों को एस॰ आर॰ एफ॰ एस॰ आई॰ परियोजना केअन्तर्गत नई तकनीक अपनाने तथा उनके प्रचार प्रसार करने मे उनके सक्रिय भूमिका के लिए सम्मानित किये जाने पर प्रसन्नता जाहिर की तथा महिला कृषकों केविशेष कार्यक्रम के आयोजन के लिए महाविद्यालय परिवार को बधाई दी। इस अवसर पर उन्होंने मृदा स्वास्थ्य की तरह स्वयं के स्वास्थ्य पर ध्यान देने की निवेदनकी। समारोह की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डा॰ पारसनाथ ने आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए महिला की कृषि मे भागीदारी की विस्तृत चर्चाकी तथा कहा कि सरकार ने महिला कृषक को सम्मानित करने के लिए इस तरह का आयोजन किया है। उन्होने नई तकनीक अपनाकर खेती करके फसलों कीउत्पादन तथा उत्पादकता को बढ़ा सकते हैं। डा॰ रणवीर कुमार, कनीय वैज्ञानिक (कृषि अर्थशास्त्र) ने विषय प्रवेश कराया तथा सिमिट द्वारा वित्त पोषित परियोजनाके अन्तर्गत किये जा रहे कार्यों एवं जीरो टीलेज प्रयोगों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने जीरो टीलेज को अधिक से अधिक अपनाकर खेती करने का अनुरोध किया।महिला कृषि वैज्ञानिकों में श्रीमती सुमन कल्याणी, सहायक प्राध्यापक (पौधा प्रजनन एवं अनुवंशिकी), श्रीमती अनुपम कुमारी सहायक प्राध्यापक (पौधा रोग) एवंश्रीमती रुबी साहा, सहायक प्राध्यापक (मृदा विज्ञान) ने अपने विचार व्यक्त किये तथा तकनीकी सत्र में कृषकों को प्रशिक्षित किया। धन्यवाद ज्ञापन डा॰ रणवीर कुमारतथा मंच संचालन सुुश्री प्रेरणा कुमारी एवं सुश्री रुमा भारती ने किया। कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में विभिन्न विषयों पर सम्बन्धित वैज्ञानिकों द्वारा चर्चा की गई तथाव्यवहारिक ज्ञान लाभ हेतु प्रक्षेत्र में लगे धान की सीधी बुआई के प्लाट पर जाकर सभी कृषकों को परिभ्रमण कराया तथा तुलनात्मक अध्ययन पर चर्चा की गई। प्रक्षेत्रभ्र्रमण में परियोजना के अनुसंधान सहायक डा॰ पवन कुमार श्रीवास्तव, प्रक्षेत्र तकनीशियन श्री नरेश कुमार यादव, श्री श्रवण कुमार, श्री मिट्ठू कुमार तथा श्री विकासकुमार ने सहयोग किया। इस अवसर पर कार्यक्रम के सफल संचालन में डा॰ जनार्दन प्रसाद

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राष्ट्रीय पोषण अभियान के तहत प्रखंड स्तरीय पोषण माह एवं मेला का आयोजन

कटोरिया बांका,आज दिनांक 25 सितम्बर को कटोरिया प्रखंड में राष्ट्रीय पोषण अभियान के तहत प्रखंड स्तरीय पोषण माह एवं मेला...

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