Tuesday, May 21, 2019

Health

A wonderful serenity has taken possession of my entire soul, like these sweet mornings of spring which I enjoy with my whole heart.

शनिवार को राज ट्रॉमा हॉस्पिटल के द्वारा होटल पनास ( नियर गांधी मैदान )में CME कैंसर एव डायबिटीज पर आयोजित किया गया

शनिवार को राज ट्रॉमा हॉस्पिटल के द्वारा होटल पनास ( नियर गांधी मैदान ) में CME कैंसर एव डायबिटीज पर...

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स्वक्ष मुख- स्वास्थ्य जीवन यही है वशी ओरोफेशियल केयर का सपना

पटना से दीपक कुमार की रिपोर्ट।।पटना: वशी ओरोफेशियल केयर द्वारा में बिहार की राजधानी पटना में मुख रोगों का अत्याधुनिक...

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लाएंस क्लब पाटलीपूत्र आस्था के कार्यकर्म के तहत फ्री हेल्थ कैंप

लाएंस क्लब पाटलीपूत्र आस्था के कार्यकर्म के तहत फ्री हेल्थ कैंप चकैया -मकैया गाँव प्रखण्ड पातेपूर ,ऊजियारपुर में अझत सेवा...

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जानिए क्यों खास है हड्डी नस रोग, जोड़ प्रत्यारोपण एवं बाल विकास विशेषज्ञ डॉ सुनीत रंजन

आज हम आपको एक ऐसे चिकित्सक से मिलवाने जा रहे हैं जिन्होंने बाल विकलांगता पर शोध करने के बाद देश...

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शिक्षण कार्यक्रम के तीसरे एवं चैथे दिन कार्यक्रम आयोजित

दिनांक 17 एवं 18 जनवरी 2019 को भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय, पूर्णियाँ में संयुक्त सचिव भारत सरकार, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, कृषि सहकारिताएवं किसान कल्याण विभाग, के निर्देश पर चलाये जा रहे कृषि उपादान विक्रेताओं के लिए समेकित पोषक तत्व प्रबंधन विषय पर 15 दिवसीय सर्टिफिकेट कोर्स हेतू प्रशिक्षणकार्यक्रम के तीसरे एवं चैथे दिन फीड बैक एवं तकनिकी सत्र का आयोजन नोडल पदाधिकारी-सह-समन्वयक डा0 पंकज कुमार यादव, सहायक प्राध्यापक-सह-कनीय वैज्ञानिक,मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन विज्ञान विभाग द्वारा किया गय दो दिनों में पूर्णियाँ, अररिया एवं किशनगंज के मृदा विशेषज्ञों द्वारा लगातार प्रतिभागियों को जानकारी प्रदान की जा रहीहै। तकनीकी सत्र में सिंचाई अनुसंधान केन्द्र अररिया के वरीय मृदा वैज्ञानिक डाॅ॰ विजयकान्त मिश्रा ने उर्वरकों में मिलावट की पहचान के बारे में तथा मिलावट के तत्वों पर विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि भारतीय कृषि में उर्वरकों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। भारत केवल चीन के बाद दुनिया में उर्वरकों का प्रयोग करने वाला दूसरासबसे बड़ा देश है। किसान सबसे ज्यादा उर्वरको में यूरिया, डीएपी, एमओपी, एनपीके एसएसपी, जिंक सल्फेट, कॉपर सल्फेट आदि का प्रयोग प्रमुख रुप से करता हैं एक उर्वरकको मिलावटी तभी माना जाएगा, यदि इसमें कोई पोषक तत्वों को खत्म करने या घटाने की संभावना है या उर्वरक ‘‘निर्धारित मानक‘‘ के अनुरूप नहीं है। यदि यूरिया में मिलावट कापता लगाना है तो एक परीक्षण ट्यूब में 1 ग्राम उर्वरक लें और सामग्री को भंग करने के लिए 5 मिलीलीटर आसुत पानी जोड़ें। सिल्वर नाइट्रेट समाधान की 5-6 बूंदें जोड़ें। सफेदप्रक्षेपण का गठन इंगित करता है कि सामग्री मिल्केटेड है। किसी भी उपद्रव का गैर गठन इंगित करता है कि यूरिया शुद्ध है। डाई अमोनियम फास्फेट एवं म्यूरेट आॅफ पोटाश मेंमिलावट का पता लगाना है तो 1 ग्राम उर्वरक लें, 5 मिलीलीटर आसुत पानी मिलायें और अच्छी तरह हिलाएं। फिर 1 मिलीलीटर नाइट्रिक एसिड डालें और फिर हिलायें। यदि यह भंगहो जाता है और अर्द्ध पारदर्शी विलियन बनाता है तो डीएपी शुद्ध है और यदि कोई अघुलनशील सामग्री बनी हुई है, तो यह मिलावटी है। इसी तरह फिल्टर पेपर के उपयोग के साथ, छिद्र में 1 मिलीलीटर सिल्वर नाइट्रेट लें। यदि पीले प्रक्षेपण का गठन नाइट्रिक एसिड की 5-6 बूंदों में भी भंग हो जाता है तो यह सामग्री में फॉस्फेट की उपस्थिति की पुष्टि करता है।नमूना और रगड़ने में छोटी मात्रा में चूने को मिलाकर, उतेजित अमोनिया गैस की गंध नाइट्रोजन की उपस्थिति को इंगित करती है। छिद्र में कोबाल्ट नाइट्राइट अभिकर्मक की 5-6 बूंदों को जोड़कर और पीले रंग के प्रक्षेपण के गठन से उर्वरकों में पोटेशियम की उपस्थिति का संकेत मिलता है। प्रक्षेपण का अनुपस्थिकी इंगित करता है। आवश्यक वस्तुओंअधिनियम 1955 की धारा 3 के तहत जारी उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 उर्वरक निर्माताओं, आयातकों और डीलरों के अनिवार्य पंजीकरण के लिए प्रदान करता है, देश में निर्मित /आयातित और बेचे जाने वाले सभी उर्वरकों और उर्वरक मिश्रण का निर्माण संबंधी उसके पैंकिंग और उर्वरक बैंग लेविलिंग लगा होता है परिवर्तन एजेंसी की नियुक्ति का काम गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशालाओं की स्थापना करना और गैर-मानक , नकली , मिश्रित उर्वरकों के निर्माण , आयात और बिक्री पर प्रतिबंध लगाना होता है। इसके अलावा इसका कामडिलरों और उर्वरक मिश्रण निर्माताओं के प्राधिकरण पत्र ,पंजीकरण प्रमाणपत्रों को रद्द करने और ईसीए के तहत अपराधियों के लिए जुर्माना के साथ तीन महीने से सात साल तककारावास की सजा प्रदान करता है। एफसीओ अपराध को भी संज्ञेय और गैर जमानती घोषित किया गया है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विशेषज्ञ के रुप में भाग लेने आए डाॅ॰ भोलानाथसाह, मृदा वैज्ञानिक, डाॅ॰ कलाम कृषि महाविद्यालय, किशनगंज द्वारा प्रतिभागियों को गोबर की खाद को बनाने की विधि के साथ साथ उपयोग पर विस्तार पूर्वक जानकारी प्रदान की।उन्होंने बताया कि खाद शब्द की उत्पत्ति, संस्कृत के ‘‘खाद्य‘‘ शब्द से हुई है और जिसका शाब्दिक अर्थ है-भोजन। अर्थत्, फसल अवशेष और अपशिष्ट पदार्थो के अपघटन से प्राप्तहोने वाले वे पदार्थ जिनका प्रयोग पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की आपूर्ति के लिए किया जाता है- जैविक खाद कहलाता है। मिट्टी में जैविक खदों का प्रयोग उतना हीआवश्यक है जितना कि नवजात शिशु के लिए माँ का दूध। जिस प्रकार माँ का दूध बच्चों का विभिन्न प्रकार की बिमारियों से बचाने के साथ-साथ उन्हें संपूर्ण पोषण प्रदान करता है, ठीक उसी प्रकार, जैविक खाद मिट्टी की भौतिक, रसायनिक एवं जैविक गुणों का सुधारने के अतिरिक्त मिट्टी में पौधों के लिए आवश्यक समस्त पोषक तत्वो की आपूर्ति करता है।पशुओं के मल-मूत्र एवं बिछावन के अपघटन उपरान्त प्राप्त खाद को गोबर की खाद कहते हैं । इसमें समान्यतयाः 0ण्5ःनत्रजन, 0ण्5ःस्फुर तथा 0ण्5ःपोटाश पाया जाता है ।इसके अतिरिक्त उसमें सूक्ष्मांत्रिक तत्व अल्प मात्रा में विद्यमान रहती है । गोबर का खाद बनाने के लिए पशुशाला के पास 20ष्ग 5ष्ग 3ष्आकार को गडढा खोद लेते हैं । इसके आधेहिस्से में गोबर, मूत्र एवं बिछावन के मिश्रण को डालते रहते हैं । जब यह डेढ़ फीट की ऊँचाई तक भ्र जाय तब उपर से मिट्टी से ढक देते हैं । अब गडढे के शेष हिस्से को गोबर, मूत्र एवंबिछावन के मिश्रण से भरते हैं । जब तक यह हिस्सा भरता है तब तक पहले आधे हिस्सा का गोबर खाद में बदल जाता है जिसका खेती में प्रयोग कर लेते हैं । यदि गोबर का प्रयोग बादमें करना हो तो इसमें थोङा जिप्सम मिला देते हैं ।तकनीकी सत्र में डा0 पंकज कुमार यादव, सहायक प्राध्यापक-सह-कनीय वैज्ञानिक, मृदा विज्ञान एवं विभागाध्यक्ष डाॅ॰ जनार्दनप्रसाद द्वारा फसलों की बुआई से पूर्व मिट्टी का नमूना प्राप्त करने की विधि विस्तार पूर्वक जानकारी के साथ साथ प्रायोगिक कार्य कराया गया। इस अवसर पर डाॅ0 पारस नाथ, सहअधिष्ठाता-सह-प्राचार्य, भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय, पूर्णियाँ ने चल रहे प्रशि़क्षण कार्यक्रम प्रशिक्षणर्थियों से फीडबैक लिया एवं प्रतिभागियों को कीटनाशकों के बारे मेंजानकारी प्रदान की।

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सामाजिक क्रांति के जनक हैं गुरु डॉ एम रहमान– मंगल पांडे

पटना।10जनवरी।बिहार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मंगल पांडे ने आज राजधानी पटना के मछुआ टोली अवस्थित महाराणा प्रताप भवन...

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कोढ़ा। विनोदपुर में करोड़ो का स्वास्थ्य केंद्र बदहाली की ओर

रिपोर्ट तौक़ीर रज़ा कटिहार।। कोढ़ा प्रखण्ड के बिनोदपुर गांव में करोड़ो रूपये खर्च कर बना अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र का उद्घाटन...

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